Baleshwar Singh : कौन है बालेश्वर सिंह भोजपुरी फिल्म के खतरनाक विलेन

बालेश्वर सिंह राजपूत का जीवनी ( Baleshwar Singh Rajput Biography)

Baleshwar Singh Rajput Bhojpuri Star Actor

बालेश्वर सिंह राजपूत ( Baleshwar Singh Rajput) जी जन्म उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के ग्राम जंगल ठकुरहीं में हुए था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव से ही प्राप्त की थी। उनके पिता मुंबई में हरी सब्जियों के थोक व्यापारी थे जिन्होंने अपनी परिवार का भरण पोषण व्यापार कर के मुंबई जीवन यापन करते थे।

बालेश्वर सिंह को पढ़ाई में अरुचि ने स्टार बना दिया

बालेश्वर जी ( Baleshwar Singh Rajput) को पढ़ाई में रुचि नहीं थी इसलिए उन्होंने मुंबई जाने का निर्णय लिया और अपना करियर बनाने का फैसला किया। जहाँ उन्हें बहुत मेहनत करनी पड़ी। वहाँ उन्हें एक फिल्म का ऑडिशन दिए जिसमे उन्हें मुख्य हीरो का किरादार मिला। उस फिल्म का नाम था ‘रघुबीरा’।

उस फिल्म के बाद से बालेश्वर जी की एक अच्छी कैरियर की शुरुआत हो गई। उन्होंने लगभग 250 फिल्मों में सहनायक के रूप में काम किया। साथ ही उन्होंने जय हनुमान नामक सीरियल में भी काम किया जहां से टेलिविजन में अपना हाथ अजमाया और वहां भी सफलता मिली।जय हनुमान के बाद लगभग 10 से अधिक सीरियल्स में अपने अभिनय का लोहा मनवाया

उन्होंने फिल्म निर्माता के रूप में भी काम किया- Baleshwar Singh

बालेश्वर सिंह ( Baleshwar Singh Rajput) राजपूत ने अपने अभिनय के साथ-साथ भोजपुरी फिल्म उद्योग में फिल्म निर्माता के रूप में भी काम किया है। उन्होंने फिल्म “बहुरानी” के जरिए फिल्म निर्माता के रूप में अपना कदम बढ़ाया था और उन्हें इसमें बहुत सफलता मिली। उन्होंने इस फिल्म के निर्माण में अपनी मेहनत और योगदान से लोगों के दिलों में जगह बना ली थी। बालेश्वर सिंह की भोजपुरी फिल्म उद्योग में एक अहम भूमिका है और उन्हें उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मान और प्रशंसा का पात्र माना जाता है।

( Baleshwar Singh Rajput)

बालेश्वर सिंह की टीवी सीरियल में भी है जलवा Baleshwar Singh

बालेश्वर सिंह राजपूत ( Baleshwar Singh Rajput) एक भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में चमकता हुआ नाम हैं, जो भोजपुरी फिल्म उद्योग में अपनी एकलव्य स्थान बनाए हुए हैं। हाल ही में उन्होंने सीरियल “किसके रोके रुका सवेरा” का 200 एपीसोड सफलता पूर्वक कंप्लीट किया है। इस सीरियल में उन्होंने अपने अभिनय कौशल का नया प्रदर्शन दिया है और लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई है। उन्होंने इस सीरियल में महत्त्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं और उनकी प्रतिभा की तारीफ हर कोई करता है। बालेश्वर सिंह राजपूत का अभिनय उन्हें उनके फैंस का दिल जीतता है।

बालेश्वर सिंह राजपूत की उपलब्धियां Baleshwar Singh

बालेश्वर सिंह राजपूत ( Baleshwar Singh Rajput) के पास बहुत सारे उपलब्धियां हैं। उन्होंने 200 से भी अधिक भोजपुरी फिल्मों में पॉजिटिव रूप से अभिनय किया है। साथ ही उन्होंने 250 से अधिक फिल्मों में निगेटिव किरदार भी किए हैं। वह दर्जनों सीरियल में भी काम कर चुके हैं और अपने अभिनय कौशल से अधिक से अधिक दर्शकों का दिल जीत चुके हैं।

भोजपुरी सिनेमा टॉप खलनायकों के सूची में है बलेश्वर सिंह Baleshwar Singh

बालेश्वर सिंह राजपूत ( Baleshwar Singh Rajput) भोजपुरी सिनेमा के खलनायकों में से एक हैं और उनकी खलनायकी की एक अलग पहचान है। वे अपने खलनायकी का जलवा इस तरह से दिखाते हैं कि जैसे ही वे पर्दे पर आते हैं, दर्शक उत्साहित होकर तालियों के साथ पूरे सिनेमा हाल में एक अलग गूंज सुनाई देने लगता है। उन्होंने अपनी 250 से अधिक फिल्मों में निगेटिव किरदार निभाये हैं जो उन्हें भोजपुरी सिनेमा के टॉप खलनायकों में से एक बनाते हैं।

बालेश्वर सिंह राजपूत का जन्म स्थान Baleshwar Singh

बालेश्वर सिंह राजपूत ( Baleshwar Singh Rajput) देवरिया जिले के हैं और उन्होंने अपने करियर में भोजपुरी सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उन्होंने अपनी खलनायकी के जरिए लोगों के दिलों पर राज किया है और उनके फैंस उन्हें बहुत पसंद करते हैं। वे फिल्म निर्माता, निर्देशक और अभिनेता के रूप में अपने करियर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सक्षम हैं। उनका जन्म स्थान उनके करियर की शुरुआत है और वह अपनी मेहनत और प्रयासों के बल पर आज इस मुकाम पर हैं।

उभरते कलाकारों को भरपूर सहयोग करते हैं बालेश्वर सिंह Baleshwar Singh

बालेश्वर सिंह राजपूत ( Baleshwar Singh Rajput) एक जाने-माने भोजपुरी फिल्म अभिनेता हैं जो अपने अभिनय के जरिए दर्शकों के दिलों में राज करते हैं। उनकी खलनायकी का जलवा हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है। वे सिनेमा जगत में बहुत अधिक सम्मान के पात्र हैं। बालेश्वर सिंह राजपूत समय-समय पर भोजपुरी सिनेमा में नए उभरते कलाकारों को भरपूर सहयोग करते हैं जो सिनेमा की दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए प्रयासरत होते हैं।

ऐसे घटनाएं जो बालेश्वर सिंह राजपूत के जीवन को बहुत प्रभावित की

आठवी पास करने के बाद जब बालेश्वर सिंह मुबई के तरफ अपना कदम बढ़ाया जहां इनके पिता सब्जी के होल सेल का व्यापार किया करते थे। जब बालेश्वर सिंह गांव से मुंबई गए तब वहा इनको एक छोटी सी खोली में रहना पड़ा जब उस छोटी सी खोली में रहने लगे तब ये सोचने लगे गांव को जिंदगी अच्छी है कहा बड़ा खपड़ैल का मकान खेत शुद्ध हवा वही दुसरी तरफ मुंबई के एक छोटे से चाली में कैद हो गए लेकिन इनके पिता जी वही रहते थे इस लिए इनको भी रहना पड़ा।

मुंबई छोड़ता चाहते थे बालेश्वर सिंह

कई बार बालेश्वर सिंह वहा से भागने का प्रयास किए लेकिन धीरे धीरे परिवार को जिम्मेदारी भी बढ़ रही थी इस लिए किसी तरह वही रहना पड़ा। किसी तरह से बारहवीं पास करने के बाद इनकी पढ़ाई में रुचि नहीं थी। जब पढ़ाई में मन नहीं लगा तो बालेश्वर सिंह अपने पिता जी बोले अब मैं पढ़ाई नहीं करूंगा पिता जी समझाए कि पढ़ाई जीवन का आधार है लेकिन बालेश्वर जी किसी का नहीं सुने और उनका का एक ही लक्ष्य था की उस छोटे से चाली से किसी तरह बाहर निकलना।

मज़दूरी करना पड़ा बालेश्वर सिंह को Baleshwar Singh

पढ़ाई छोड़ने के बाद रोजगार के तलास में लग भाग 15 कंपनियों में मजदूर का काम करने गए लेकिन ये ठहरे कलाकार आदमी जब कोई उल्टी बात करता था तब ये अपनी नौकरी छोड़ देते थे। पंद्रह कम्पनियों में काम करने के बाद बेल्डिंग का काम सीखने लगे और धीरे धीरे 1 साल गुजर गया अब बालेश्वर सिंह एक फर्स्टक्लास बेल्डर बन गए थे लेकिन बेल्डिंग के काम में भी इनको मन नही लगता था क्यों की क़िस्मत को कुछ और ही मंजूर था

बेल्डिंग का काम करने से बालेश्वर जी के आंखो मे कुछ परेशानी हुई  तो बालेश्वर सिंह बेल्डिंग का काम भी छोड़ दिए। उन दिनों केबल के जरिए लोगों के घर में लाइट दिया जाता था बालेश्वर जी के घर में भी लाइट का कनेक्शन था जब महीने पूरा होने पर लाइट का बिल नही जमा हुआ तब केबल वाले ने लाइट ही काट दी तब बालेश्वर सिंह ने ठान लिया अब केबल ही चलाऊंगा और एक समय आया जिसने केबल काटी थी उसी ने अपना केबल बालेश्वर सिंह के हाथों बेच दिया

अब बालेश्वर सिंह का एक सपना पूरा हुआ हालाकि उसमे भी बहुत मेहनत था बारिश में भींग कर केबल खींचता पड़ता था रात में किसी का लाइट खराब होने पर फोन आता था तो उसे ठीक करना पड़ता था ऐसे धीरे धीरे समय गुजरता गया और इनका एक ये बिजनेस हो गया।

अब बालेश्वर सिंह का सिर्फ यही काम था जब भी इससे फुर्सत मिलता ये सिनेमा देखने चले जाते थे कोई भी सिनेमा आता उसका पहले शो जरूरत देखते थे। एक दिन बलेश्वर सिंह अख़बार पढ़ रहे थे जिसमे लिखा था एक्टर की जरूरत हैं तब बालेश्वर जी सोचे की मैं भी एक्टर बन सकता हूं क्योंकि स्कूल में नाटक किया करते थे। अखबार में जो Ad निकला था उस पते पर गए वहा इनसे 300 रूपया ऑडिशन चार्ज लिया गया जब बालेश्वर जी को डायलाग दिया गया और वहां और भी नासमझ लोग थे जो एक्टर बनने गए थे।

ऑडिशन लेनवालो देखा कौन आदमी पैसा दे सकता हैं उस को दोबारा बुलाया और कहा 20000 रूपया लगेगा जिसमे आप लोगो को ट्रेनिंग दी जाएगी जिससे आप आगे कुछ कर सकते हैं। बलेश्वर जी से पच्चीस हजार रूपए का डिमांड किया गया बालेश्वर सिंह किसी तरह पैसा का इंतजाम कर के उन्हें पैसे दे दिए पैसा लेने के बाद एक महीना परेशान किया गया और कुछ नही हुआ वे लोग पैसा लेकर लापता हो गए।

Deoria Zila के टुनटुन गुप्ता का फिल्म इंडस्ट्री में जलवा

फिर एक बार अखबार में Ad देख कर गए वहां भी सेम घटना घटी वहां दस हजार का डिमांड किया गया जो आज के डेढ़ लाख के बराबर है। इसी बीच बालेश्वर सिंह का बॉलीवुड के जाने माने एक्टर विक्रम गोखले जी से मुलाकात हुई उन्होंने बताया ऐसे घूमते रह जाओगे और कुछ नहीं होगा। गोखले जी थिएटर करने की सलाह दी।

बालेश्वर सिंह ( Baleshwar Singh Rajput) जब थिएटर गए तब इन्हें पता चला की फिल्म इंडस्ट्री क्या होती हैं क्यों की पृथ्वी थिएटर में बॉलीवुड के सारे कलाकार वही आते थे जैसे,राजपाल यादव,विजय राज, जॉनी लीवर,उस समय भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री था ही नहीं थिएटर करने के बाद बलेश्वर सिंह को पहला ब्रेक मिला संजय खान का सीरियल जय हनुमान से,लेकिन इस बीच स्ट्रगल करते करते 3 साल बीत गया और 3 साल तक पालघर से मुंबई सेंट्रल आना जाना लगा रहा,जय हनुमान सीरियल के बाद दूसरा ब्रेक ओम नमः शिवाय में मिला फिर धीरे धीरे कई सारे सीरियल में काम करने लगे।

उसी बीच भोजपुरी फिल्मों का दौर शुरू हुआ और भोजपुरी फिल्म ससुरा बड़ा पैसा वाला बन रही थी,उसी समय एक एक बालेश्वर जी के हाथ आई जिसका था  “लगी छूते ना” उसके बाद बालेश्वर सिंह खुद एक फिल्म बनाए जिसका नाम था “रघुवीरा” आज के भोजपुरी तो डायरेक्टर पराग पाटिल की पहली भोजपुरी फिल्म थी जिसे बालेश्वर सिंह ने दिलाया था ये फिल्म किया उसके बाद फिल्मों में काम करने का सिलसीला चलता रहा फिर टेलिविजन में भोजपुरी का हाला चैनल लांच हुआ जिसका नाम था मैजिक टीवी इस चैंनल के मार्केटिंग हेड बन गए फिर महुआ चैनल आया और  अपने चैनल का सीरियल करते रहे धीरे धीरे चलता रहा और 2011 दोनो चैनल बंद हो गया।

बिहार के इस गांव से निकर कर स्टार बनी Shivani Singh

चैनल बंद होने के बाद अब बालेश्वर सिंह के पास कोई रास्ता नहीं था उसी समय खलनायक की भूमिका में पहली भोजपुरी फिल्म में अभिनय किए जिसका नाम था “कालिया” जिसमे हैदर काजमी,और अक्षरा सिंह जैसे कलाकारों ने काम किया। उसके बाद बालेश्वर जी की दूसरी फिल्म उसमे भी खलनायकी किए जिसका नाम था “दिल ले गइल ओढानिया वाली” और धीरे धीरे विलेन बनने का सिलसिला ऐसे सुरु हुआ की आज तक नहीं रुका आज भी सबसे बिजी शेड्यूल के खलनेता हैं।

बालेश्वर सिंह राजपूत,उसके बाद 2016 में फिल्म निर्माण के क्षेत्र में अपना हाथ आजमाए और पहली फिल्म बनाई जिसका नाम था  “गर्दा” उसके बाद “बहुरानी” उसके बाद तामाम फिल्मों का निर्माण किए साथ में एक्टिंग भी करते रहे तो इस प्रकार से बलेश्वर सिंह के फिल्मी कैरियर की शुरुवात हुई।

Baleshwar Singh

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