Sanjay Pandey संजय पांडे कर दिए तीखी वार

Sanjay Pandey

Sanjay Pandey संजय पांडेय की कलम से तिलमिला गए भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोग

Sanjay Pandey संजन पांडेय की चली तीखी कलम

Sanjay Pandey आज की कहानी भोजपुरी के मजबूत चरित्र अभिनेता संजय पांडेय की कहानी। विलेन के रूप में आपने उन्हें पर्दे पर ज्यादा देखा है। हालांकि किसी भी किरदार में जान फूंक देने का माद्दा रखते हैं संजय पांडेय। भोजपुरी इंडस्ट्री में मैं बहुत कम ऐसे लोगों को जानता हूं जो हर समय कुछ नया सीखने की कोशिश में जुटे रहते हैं। जो कुछ न कुछ नया लिखते पढ़ते रहते हैं।

आप संजय पांडेय जी से जब भी मिलेंगे किसी नई किताब पर चर्चा होगी, अभिनय के किसी बारीक पहलू पर चर्चा होगी, भोजपुरी इंडस्ट्री की बेहतरी पर चर्चा होगी या फिर माहौल को हल्का करने के लिए कुछ कॉमेडी रील्स की तैयारी होगी। पर्दे पर जितना ही गंभीर और खतरनाक यह इंसान दिखता है, अंदर से उतना ही सहज और मासूम है।

इनकी एक और खासियत है जहां कमियां हैं उस पर ललकार कर बोलते और लिखते हैं। भोजपुरी इंडस्ट्री में जल्दी लोग कमियों पर सवाल नहीं उठा पाते। खासकर चरित्र अभिनेताओं के लिए तो और दिक्कत है। इंडस्ट्री पर सवाल उठाना मतलब खुद के लिए मुसीबत मोल लेना। लेकिन संजय पांडेय जानते हैं कि चीजें बेहतर करनी है तो आवाज तो उठानी होगी। चीजों को बेहतर करना है तो सिस्टम को कई बार आईना दिखाना पड़ता है।

और फिर अगर अपनों के हक के लिए अपने ही आवाज नहीं उठाएंगे तो उठाएगा कौन? और यही बात संजय पांडेय को सबसे अलग और खास बनाती है।

Sanjay Pandey

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Sanjay Pandey संजय पांडेय सवाल करने से में सबसे आगे

अभी पिछले दिनों ही उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में बड़े स्टार्स को छोड़कर बाकियों के हालात पर बेबाकी से अपनी कलम चलाई थी और पूछा था कि “आखिर कितने फीसदी अभिनेता और तकनीशियन ऐसे हैं जो अपनी कमाई से घर और गाड़ी लिए हैं, शायद 5 फीसदी। हम लोग हीरो लोगों के घर और गाड़ी को देखकर खुश हो जाते हैं.”

संजय पांडे का यह सवाल भोजपुरी इंडस्ट्री के लिए बहुत ही जरूरी और गंभीर सवाल है जिस पर बहस होनी चाहिए। ऐसे सवाल उठाए जाने जरूरी हैं और इन सवालों को उठाने के लिए संजय पांडेय बधाई के पात्र हैं।

भोजपुरी इंडस्ट्री को बेहतर कोई बाहरी नहीं कर सकता है। इसके भीतर के लोग ही इसे बेहतर कर पाएंगे और इस बात को संजय बखूबी जानते हैं। पर्दे पर अपनी अदायगी से सबको कायल बनाने वाले संजय पांडेय भोजपुरी इंडस्ट्री को बेहतर बनाने के लिए जिस तेवर से इन जरूरी मुद्दों को उठा रहे हैं, उसके लिए एक सलाम तो बनता ही है।

भोजपुरी के कुछ लोगों ने कहां Sanjay Pandey की ये तेवर बरकरार रहे। बस यही दुआ है। नया पढ़ते रहिए, नया गढ़ते रहिए, इस जिंदादिली को खुद में बरकरार रखिए और अपनी अभिनय से हम सबका मनोरंजन करते रहिए। बस यही दुआ है, एक बार फिर संजय पांडे को बधाई अभिनय में अब तक की इस खूबसूरत यात्रा के लिए.

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Sanjay Pandey संजन पांडेय से भिड़ गए पीआरओ संजय भूषण पटियाला

Sanjay Pandey:- संजन पांडेय की चली तीखी कलम तो बहुत लोगों की प्रतिक्रिया सामने आई जिनसे कुछ Sanjay Pandey के सपोर्ट में थी तो कुछ विरोध में जिसमे से नंबर वन में संजय भूषण पटियाला की Sanjay Pandey के सवालों के देख कर पीआरओ संजय भूषण पटियाला ने कहा –

“Sanjay Pandey आप आप संजय पांडे जी कब तक ऐसी बातें फेसबुक पर आप लिखते रहेंगे अगर सच में अगर इंडस्ट्री में बदलाव करना है तो एक फिल्म का निर्माण खुद करिए आप जिस का लेखक – निर्देशक भी आप खुद हो इस तरह की बाते लिखकर आप खुद को क्या समझ रहे है बदलाव लाना है तो अच्छी फिल्मे करे कहानी पूरा सून कर आप बुरा मत समझ लेना मैं भी आप का शुभचिन्तक हू .एक दो दिन का फिल्मों मे किरदार करने से बदलाव संभव नही है अच्छी फिल्मे करे आप बाकी सब को एक लाइन से मना कर दे” 

निष्कर्ष

वैसे तो भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में बहुत लोग आए नाम कमाए लेकिन भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए नही सोचते Sanjay Pandey जैसे बहुत कम लोग हैं जो टेक्नीशियन स्पॉट ब्वॉय ड्रेस मैन क्राउड आर्टिस्ट के बारे में सोचते हैं लेकिन अब sanjay pandey ने बदलाव का आगाज़ कर दिया है जल्दी ही छोटे लोगों के लिए कुछ अच्छा होगा।

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